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हमारे भीतर की अच्छाइयां ही हमें शुद्धता की ओर ले जाती है लेकिन इसे किसी और से…

हमारे भीतर की अच्छाइयां ही हमें शुद्धता की ओर ले जाती है लेकिन इसे किसी और से सुनने से बेहतर खुद इसका साक्षी बन इसको महसूस करने का अनुभव करना चाहिए
क्योंकि अच्छाई की स्याही से भरी कलम सदैव ईश्वरीय शब्द की रचना करती है
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