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हमारि कहानी्

हम् ज्ञानते है आप् ज्ञरुरत् है हमारी,
फिरभी आपसे दूर् है।
ज्ञिनदेगी ज्ञिना तो होगी,
किउकी हम् मज्ञबूर् है।
दुनिया दारी देखली हमने,
दिलकी दरबा ज्ञो से।
खूसिया देखनेसे छलकतेहे आसू,
दरदसे ज्ञे हम् ज्ञे चूर् है।
फिरभी एक् रसनि ज्ञालाकर् राखदिये,
अनधेरो् कि गेहेरायीमै।
आपसे एकदिन् मुलाकत् होगी,
उसदिनकी ज्ञितमै्।।
©Debika