हमको हम्ही से वो मिलने नहीं देते
दिल है सब सोख्ता इसे मचलने नहीं देते।
क्या बेनजीर की सूरत मलीं नहीं होती
शायद इसलिए कि वो हमे ठहरने नहीं देते।
आज वस्ल की रात थी चांद की चांदनी में
रोशनी से खौफ है जो एक जुगनू जलने नहीं देते।
हैरान हूँ किस तरह करूं मैं अर्ज ए तमन्ना
रकीबों को तो वो पहलू से टलने नहीं देते।
दिल वो कि फरियाद से लबरेज है हर वक्त
एक हम हैं कि मुंह से कुछ निकलने नहीं देते।
काटता है अनुराग दिन रात अब किस्मत समझ कर
वगरना वो निगाह से निगाह तक लड़ने नहीं देते।
©anuragrahi
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