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हमने खुद से खुश रहने का जबान ले लिया।

हमने खुद से खुश रहने का जबान ले लिया
कुचा-ए-यार में हमने एक मकान ले लिया।
बेज़ार तन्हा सा रहा करता था मैं अक्सर
बेजान जिस्म में उधार किसी से जान ले लिया।
मेरे किए हुए फरेबों को अब माफ करें दुनिया
आज मैंने एक फरिश्ते से है इमान ले लिया।
गर्दिश-ए-वक्त आती रहे खुद चली जाएंगी
मैंने बड़े-बुजूर्गों से ये वरदान ले लिया।
ख्वाहिश किसी चीज़ का और क्या करेगा अनुराग
उन्हें पा कर तो अब मैंने दो-जहान ले लिया।
©Anuragrahi