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हर बात बखुबी जानती है

आँख भी अपने आँख से निकले आंशु की कीमत को अच्छे से जानती है
किसे बहाना है किस वक़्त वो ये बखुबी जानती है
दिल ने किसे अपना कहा ये बात
वो धड़कन ये बात वो धड़कन बखुबी जानती है
सांसो का चलना ही काफी नही है ये बात
वो किसे चाहती है ये बात हर एक सांस बखुबो जानती है

में तो तुम्हे कब से अपना मान चुका हु ये बात
में तो जनता हु मगर तुम कहा मानती हो
मेरा मानना ही काफी नही है ये बात
पर तुम भी मुझे चाहती हो ये बात तुम ना मानो बेशक मुझे अपना
ये बात तुम्हारी हर धड़कन बखुबी जानती है
©deepakshar