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हर दिन नया इश्क़

हर दिन नया इश्क़

तुम्हें चुना है मैंने, हर रोज़ चुनने के लिए,

तुम्हें चाहा है मैंने, हर रोज़ चाहने के लिए।

जैसे रोज़ आता है सूरज नई सुबह के लिए,

वैसे ही चाहूँगी तुम्हें, हर दिन नया सा लिए।

मैं कभी थकूँगी नहीं तुमसे इश्क़ करते हुए,

कभी पुराना न होगा ये प्रेम, मेरे होते हुए।

मेरा प्यार तुम्हारे लिए रोज़ बढ़ेगा, जाना,

हर दिन थोड़ा-थोड़ा और नया होगा, जाना।

मेरे इश्क़ में कभी भर जाने जैसा कुछ नहीं होगा,

क्योंकि रोज तुझसे इश्क़ पहले से थोड़ा ज्यादा होगा।

हम दोनों ही रहेंगे सदा , एक-दूसरे के संग

जैसे कड़ाही और कड़छी साथ हों एक संग।

पर हर रोज़ एक-सा स्वाद नहीं होगा,

कभी पनीर, कभी राजमा-चावल, कभी कुछ और होगा।

कभी तुम चाय की जगह कॉफी बना लेना,

कभी मैं तुम्हें लेमन टी पिला दूँगी।

रोज़ मैं साड़ी में रहूँगी, और तुम कमीज़ में,

पर कभी मेरी साड़ी से अपनी शर्ट मिला लेना।

कभी मेरी पसंद का रूमाल ले लेना तुम,

कभी अपनी पसंद की चप्पल मुझे दिला देना।

कभी चलेंगे हम तुम्हारे पसंद के पहाड़ों पर,

कभी मेरे लिए तुम भी वृंदावन आ जाना।

कभी मैं तुम्हारे साथ एक्शन मूवी देखूंगी,

कभी तुम मेरे साथ रोमांटिक मूवी देख लिया करना।

पर कभी-कभी अजनबी बनकर फिर से कर देना

इश्क़ का इजहार,

और कभी मैं भी एक गुमनाम खत लिख दूँगी तुम्हारे नाम,

जिसमें छिपा होगा मेरा सारा प्यार।

हर साल एक तस्वीर साथ में खिंचवाएँगे,

और उसे यादों के संदूक में सजायेंगे

हर लम्हा यूँ ही संवारेंगे,जैसे पहली बार हो सब—

पहली खुशबू, पहली छुअन, पहली महोब्बत सा निभाएंगे

हर रोज़ प्रेम करते हुए,

हर रोज़ नया प्रेम करते हुए,

एक-दूसरे को बार-बार चुनते हुए…

न वचनों से, न किसी वादे से,

बस दिल की गहराई से—

हर रोज़, सिर्फ एक-दूसरे को चुनते हुए…

एक दिन हम इस दुनिया से विदा होंगे

तब भी अपने जीवन भर के नए-नए प्रेम को लेकर साथ ।

एक दूजे की आखिरी नयी तस्वीर को मन मे बसाये हुए

अपने बूढ़े नये नये हाथो को पकडे हुए

चल देंगे अपनी अंतिम नयी यात्रा पर साथ साथ 😂


✍️शिवन्या