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हर दिन यूंही खाली खाली बितती जाती हैं।

हर दिन यूंही खाली खाली बितती जाती है
तेरी जुदाई अब बहुत सताती है।
तू जो खफा हुई दुनिया रूठ गया
तेरी यादें ही बस ढाढस बंधाती है।
है रूह का मसला जो मैं समझा नहीं
क्यों इस जिस्म को छोड़ दुसरे में चलीं जाती है।
हम तो साथ साथ जिने मरने की कसम खाई थी
फिर जिंदगी अपने वादे से क्यों मुकर जाती है।
पता है उसको मुझसे बेहतर जिंदगी मिली होगी
मगर मेरे बगैर वो रात कैसे बिताती है।
अनुराग तू ऐसे ही अब तन्हा रहने की आदत डाल
हर रिश्ता रफ्ता रफ्ता ऐसे ही बेवफा हो जाती है।
©anuragrahi