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हर रोज एक चिज टुट जाती है।

अब क्या हो रहा है मेरे साथ जिसे,
बार बार मात मुझे ही आती है।
आज एक बात तो बताओ मुझे,
जिन्दगी इतना क्यों सताती हैं
तमन्नाओं से लबरेज थी मेरी जिंदगी,
अहसासें अब तक रूलाती है।
क्या सितम है कि अब तेरी सूरत,
गौर करने पर याद आती है।
मातम सी छाई है इस नाजुक दिल पर,
जैसे धड़कने मौत में रूक जाती है।
कौन इस घर की देखभाल अब करे,
हर रोज एक चिज टुट जाती है।
©anuragrahi