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हर शख्स मुझसे अब तग़ाफ़ुल करता है क़ब्र में लेटा भी नहीं मेरा चादर कुबूल करता…

हर शख्स मुझसे अब तग़ाफ़ुल करता है

क़ब्र में लेटा भी नहीं मेरा चादर कुबूल करता है

मैं अपने कमरे को हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहता हूं

और वो कि हर जगह मिट्टी-धूल करता है

वो खुदा है सबकी रक्षा करना उसकी जिम्मेवारी है

फिर क्यूं मेरे रोज़ी का बती गूल करता है

कोई गर बेवजह चाटी मार दे दर्द उतना नहीं होगा

पिट पिछे जितना चुगली शूल करता है

मैं बार बार उसे मुझे न भुलने की याद दिलाता हूं

और वह हर बार एक ही भूल करता है।