कविताओं की लताओं को देखकर ,
बागबान रुपी ह्रदय में आनंदित पुष्प खिल जाता है
जैसे हृदय अपनी ही उपजाऊ भूमि को देखकर
तृप्त हो जाता है
वास्तव में सभी के हृदय की यही दास्तां है
अच्छाई ही हृदय की परछाई है
जब निकलता है मानव का हृदय अपने वास्तविक गुण की खोज में तो ,
हृदय के हर छोर में अच्छाई का बीज परिलक्षित हो जाता है!!
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