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" ह्रदय डोर "

बच्चों का प्रेम इस कदर पाया ....
उनके शब्दों की मिठास में मैंने अपनापन पाया...
मेरे कदमों की आहट ने ,
जब उनके हृदय में उत्सुकता को बढ़ाया ,
तब मैंने उनके मासूम चेहरे को सामने कतार में पाया चमकती उनकी आंखों में निश्चल प्रेम था समाया...
उनकी चंचलता को समेटकर मैंने उन्हें गोद में उठाया ,
तो उनकी मुस्कुराहट में जन्नत नजर आया...
उनकी मुस्कुराहट को बढ़ाने में ,
जब मैंने अपने प्रयासों को आजमाया ,
तो एक मुस्कुराता चेहरा मैंने अपने भीतर भी पाया..
उनकी पुकार में प्रेम का संगीत है समाया...
उनका मुझे खींच कर ले जाना मुझे इस तरह भाया,
कि मैंने उनकी शरारतो का साथ निभाया....
ईश्वर का आभार है कि उन्होंने मुझे इस काबिल बनाया
कि मैंने नन्हे ह्रदय में अपने लिए प्रेम है पाया......
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