परिस्थिति के हर मंज़र में
हृदय का पर्दार्पण कर
सभी की खुशियो के बहाव में
उनकी प्रसन्नचित्तता के दर्शन कर
मुस्कान के पौधे उपजा सब में
हृदय भूमि में उनके उपजन भर
दिखे जहाँ सूखा तो बादल बन गर्जन कर
मधुरतम् बूँदों से आत्मीयता का बरसन कर
देने के दायित्वों में हृदय को अग्रिम कर
हृदय की सरलता को ईश्वर समक्ष अर्पण कर
और हृदय को अच्छाइयों का साफ़ झलकाता दर्पण कर ...
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