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हसीन चेहरा

हसीन चेहरा कयामत की दास्तान है
इसी चेहरे पे तो होते लाखों कुर्बान हैं
चेहरा है या चांदनी का बसेरा
सूनी सूनी रात का सुनहरा सबेरा
गर चेहरा हसीं हो तो दिल मेहरबान भी हो
लवों पे हंसी हो तो खुलकर बयान भी हो
तुमने जब भी उठाई अपनी तिरछी नजर
मौसम बदल गया और लोग ग्ए ठहर
अदा से अपनी इसी तरह शमां हसीन रखिए
धरती सुनहरी रखिए आसमां नमकीन रखिए
मरने को तैयार बैठे हैं आशिक कितने
नजर का खंजर जिगर के पासमीन रखिए
यूं न फंसाईए लोगों को अपने जाल में
यूं न मिलाईए ताल लोगों के सुरताल में
जमाने को फिसलने से रोक लीजिए
हसीं चेहरे पे हिजाब रख लीजिए
खूबसूरती सदा से दुश्मन रही है दिमाग की
हमेशा दिल से नहीं कभी दिमाग से भी सोचिए
©selfmade