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हुआ सवेरा छटा अंधेरा।।

हुआ सवेरा छटा अंधेरा
फुलों ने अब अंगड़ाई ली।
छोटी छोटी मोतियों जैसी
ओस के बुंदों ने विदाई ली ।
कु कु करके बोली कोयल
कौए ने भी एक जम्हाई ली ।
सि सि करती चलती हवा संग
पेड़ों ने भी सर झुमा ही ली ।
खेतों में लहलहाती फसल देख
हलधर ने भी कुछ गुनगुना ही ली।
मेरे सुर के भी तार जुड़ गए जो
नाजुक शब्दों से कविता बना ही ली।
©anuragrahi