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हुस्न इख्तियार ए यार में नहीं महफूज़ रख पाना ।

हुस्न इख्तियार ए यार में नहीं महफूज़ रख पाना
ये दिल दिल ए जार है उनका मुरीद बन रह पाना ।
उनकी हर तबस्सुम पे है निछावर दिल ओ जां दोनों
किसी के वश में नहीं है मुंह फेर के गुजर पाना ।
रहा करती है नमी निगाहों में सहर की शबनम की तरह
अनुराग बिमार नमुमकिन है इश्क ए मर्ज से उबर पाना।
©anuragrahi