हवाएं जब हमारे चेहरे से टकराती है....
तो लगता है जैसे वह अपना पुराना संबंध बताती है...
और भीतर में शांति की लहरें उठ जाती है....
उन लहरों के संग एक कश्ती आती है .....
जो हमें किसी दूसरी दुनिया में ले जाती है....
जहां सुंदरता की चादर ओढे ही बस प्रकृति ही नजर आती है....
लहरें टकराकर हमारे चेहरे पर बूंदे बरसाती है.....
हवाओं की शीतलता हमें लोरी सुनाती है.....
और उस नाव की शैय़या पर ही हमें नींद आ जाती है...
लगता है जैसे प्रकृति हमें अपनी चादर में समेट कर अपने दामन से मिलाती है....
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