ईनाम-ए-मोहब्बत
चर्चा शहर में ये आम है तुम जानते हो,
हम इश्क़ में बदनाम है तुम जानते हो।
मयकश अंजुमन में भी ज़िक्र है मेरी मोहब्बत का,
हर मयनोश के लबों पे मेरा नाम है तुम जानते हो।
एक दिलरुबा ने मुस्करा कर के दिल चुरा लिया था मेरा,
दिल आज भी उस दिलनशीं पे कुर्बान है तुम जानते हो।
महफ़िल-ए-उल्फ़त में हर रोज चर्चे हैं मेरी सदाक़त के,
ये इश्क़-ओ-अकीदत में मिला इनाम है तुम जानते हो।
© विशाल सैनी