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"ईश्वर "

हृदय में ईश्वर की गहन पुकार है
उनमें ही समा जाने की उसकी दरकार है
जब जब होता हृदय पर क्लेशों का प्रहार है
तो उसकी हर एक कोर से निकलती,
ईश्वर की उत्कंठा अपरंपार है
बहती नैनों से अश्रु की धार है
मन का व्यापार ही वास्तविक अंधकार है
जहां ईश्वरीय समर्पण से ही होती जीवन की नैया पार है सर्वसमर्थ ईश्वर ही हर कण में साकार है
और ईश्वर ही कण की सीमा से परे निराकार है।।
-Siddha
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