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ईश्वर और खुदा

शब्दों की रजा है
ऐ ग़ालिब तू किस ओर चला है
ईश्वर को समझना ही तेरा फलसफा है
इबादत का दरमियां ही खुद से वफा है
हर जर्रे में ईश्वर और खुदा है
भटकती निगाहों की तलाश बेवजह है
ह्दय को साज ले यही रूह का जन्नती मजा है
ऐ ग़ालिब तू किस ओर चला है
यहां हर जर्रे में ईश्वर और खुदा है।
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