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" ईश्वरीय आभास "

ईश्वर के रूपों का बखान क्या करे
भीतर से उनके मिलन की बात क्या करे
समझाये क्या शब्दों से उनके लिए आभास जो करे
सांसो की सरगम से उनके दिए प्राण हम भरे
सार्थकता की सीमा से खुद को तार हम करें
साये संग उनके में एकांत में रहे
उनके ही आभास का आभार क्या करें
शब्दों की सीमा से उसका ऐतबार क्या करें
छांव से उनकी पल-पल खुद को सरलता से तार हम करें
और ईश्वर ही ईश्वर हम पुकारते फिरे
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