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" ईश्वरीय अंश "

इंसान की इंसानियत में ईश्वरीय अंश छिपा है....
जब भी वह सूक्ष्म जीवों को देख कदमों से रुका है....
जब भी कुछ गलत करके उसका मन आत्मग्लानि से भरा है....
जब भी किसी को आनंदित देख उसका भीतर भी आनंद की गंगा में बहा है....
जब भी वह किसी के दुख का सहभागी हुआ है....
जब भी वह मदद की पुकार में तन मन से मददगार हुआ है....
जब भी उसकी आंखों में दया की चमक का प्रकाश हुआ है....
जब भी वह भीतर की पराकाष्ठा से अवगत हुआ है....
जब भी उसने अपने मन की सुंदरता पर काम किया है..
तब वह इंसान ईश्वरीय अंश हुआ है और ईश्वर रूपी सूर्य का उसके भीतर उदय हुआ है..||
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