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" ईश्वरीय गोद "

हृदय में अश्रुओ का भंडार है
आंखों से बरसती मासूमियत की धार है
ईश्वर की गोद में जाने की कामना ही सवार है
हर ओर ईश्वर के स्वरूप की ही बहार है
फिर भी ह्रदय व्याकुलता से तार है
कहता है भीतर की उनकी गोद में शांति का संसार है
जिससे व्याकुलता से किनार है
लगता है जैसे संसार की दौड़ में हुए हृदय पर कई प्रहार है इससे आंखों में निश्चल बरसती बूंदों का समाहार है
भीतर के दरमियान में ही ईश्वर का सार है
पर ह्रदय की कामना मे ,
ईश्वरीय गोद की भरमार है ।
ईश्वरीय गोद की भरमार है।
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