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इजाद-ए-इश्क़ में मैने फितरत बदल लिया ।

इजाद-ए-इश्क़ में मैने फितरत बदल लिया
क्या-क्या न जाने तमन्ना-ओ-हसरत बदल लिया।
जिन्हें आजतक कभी दिद-ए-उल्फत न देखीं
अहद-ए-उल्फत में सलीका-ए-नफरत बदल लिया।
आप भी है बड़े अजीज मेरे महबूब के
चलो आज से मैंने रकाबत बदल लिया ।
करता आया हूँ अब तक हमेशा मुनाफे का सौदा
मिलकर आपसे अपना तिजारत बदल लिया ।
इश्क में है जान-जोखिम अब ये जानकर
खुदा की कसम हमनें अपना उजरत बदल लिया ।
©anuragrahi