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इक दिन है जिस्म गर तो रवानी आ जायेगा।

इक दिन है जिस्म गर तो रवानी आ जाएगा
जिंदगानी है तो आज़मा के सभी देखा जाएगा।
अगर सोचता रहा तो लकड़ी को खा जाता है घुन
वैसे ही ये ग़म मुझे रफ्ता रफ्ता खा जाएगा।
मेरे मौत पर तेरे इस चुप रहने का माजरा
फ़िक्र न करों तुमसे भी कुछ न कुछ पुछा जाएगा।
मेरी मानन मेरी इबादत जान से जाऊंगा मैं
इस दिल लगी में आपका कब क्या जाएगा।
मेरे सामने से मुस्कुरा कर मेरे दिल को चिढ़ा कर
जा रही हो तो जाओ खैर देखा जाएगा।
तेरे इस बेवफाई का मैं जिक्र कैसे करूं
देखना अनुराग को भी एक दिन बेवफाई आ जाएगा।।
©anuragrahi