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इंकार और इकरार

गजब का इंकार है तेरा भी,
यूँ गरदन हिला के मना करना ,
और मुस्कराना
फिर शरमो हया से नजरे झुकाना
थोड असमंजस सा है
तेरा इंकार और इकरार को जान पाना...
©kamalsingh