G gulshan en July 23, 2025 इन्सानियत आज इन्सानियत को, क्रूरता और दूराचारी की मर्यादा को लांघते देखा, जब मैंने उस औरत की इज्ज़त को , सरे बाज़ार, नीलाम होते देखा ।।©gulshan