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इंसानियत के कातिल

आज इक इंसान से मुलाकात हुई,
थोड़ी ही सही मगर कुछ बात हुई,
बोला कि मुझसे क्या गुनाह हो गया,
जो मैंने किसी को बचाने का सोच लिया,
सड़क पर वो मौत से लड़ रहा था,
दर्द इतना था कि शायद मौत की दुआ कर रहा था,
अपनी रेहड़ी पर लिटाकर चल पड़ा,
अस्पताल पहुंच कर पता चला,
रास्ते में यमराज उसको लेकर निकल पड़ा,
पुलिस ने मुझको ही घेर लिया,
बोले, तूने ही इसका कत्ल किया,
आदमी बोला, मैंने तो इंसानियत का फर्ज निभाया,
कौन है इंसानियत के कातिल, ये आज समझ आया.
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©vikasgarg