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इन्तजार

इन्तजार हद तक हो तो अच्छा लगता है
वर्ना अपना भी पराया लगता है
अपनों को समय दिया करो
वर्ना वो रिश्ता कोई मायने ना रखता है।
हो जाती है आदत बिना आपके रहने की
फिर आपकी मौजूदगी का कोई एहसास न रहता है
इन्तजार हद तक हो तो अच्छा लगता है।
जब वो आपको अनदेखा कर देंगे
तब आपको गलतियों का एहसास भी रहता है
उनकी मौजूदगी आपके लिए क्या थी
इस बात का आपको अफसोस होता है
इन्तजार हद तक हो तो अच्छा लगता है।
फिर पछतावा करोगे उनके मुंह मोड़ने का
फिर उनकी कमी का एहसास होता है
अब उनके लिए ये एहसास कोई
मायने ना रखता है
इन्तजार हद तक हो तो अच्छा लगता है।
©shivanii