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इंतज़ार

आज भी ये निगाहे तुम से रुबरु होना चाहती है
की आज भी ये निगाहे तुम से रुबरु होना चाहती है,
पर शायद ये हमारी तकदीर को गवारा नही........
komalsoni✍
©komalsoni