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इस दिल को खुद पर ऐतबार तुझे देख कर हुआ ।

इस दिल को खुद पर ऐतबार तुझे देख कर हुआ
चांद का दिदार आज तुझे देख कर हुआ।
यूंही ख्वाबों में देखकर लिखते थे ग़ज़ल अब तक
मेरे लफ्जों के खुबसुरती का ऐहसास तुझे देख कर हुआ।
इस दिल की सदाएं रूक गई थी अल्फाज़ बनते-बनते
जो आज मुकम्मल ये शायरी तुझे देख कर हुआ ।
आओ हम आज हर तम्मनाओं की कर्जा उतार दे
फिजाओं का भी बदला मिजाज है तुझे देख कर हुआ ।
गुलशन में है गुल खिले मंडरा रहे भंवरे उसपर
फुलों का भी रंग गहरा लाल तुझे देख कर हुआ ।
अश्कों से लिखेंगे ग़ज़ल जब तुझे सुनाएंगे
अनुराग के दिल का हाल जो तुझे देख कर हुआ ।
©anuragrahi