तेरे नाम से एक मंदिर बनाऊँ मैं
उसमें तेरी एक तस्वीर सजाऊँ मैं
हर पल आते -जाते तुझे नयनन में बसाऊँ मैं
आठों पहर बस तेरी ही आरती गाऊँ मैं
तुझ से ही जागूँ तुझ में ही समाऊँ मैं
इस तरह तुझे अपनी ज़िंदगी बनाऊँ मैं
इस तरह तुझे अपनी ज़िंदगी बनाऊँ मैं...
©deeprichu
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