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इश्क भी एक मजबुरी

अपने जवां उम्र की भी कोई विसाल हो
मैं हूं गर रांझा तो कोई हिर की मिशाल हो।
अदब नहीं जमाने में न कोई पुख्ता कानून
कब तलक यूं छुप कर दो दिलों की विसाल हो।
©anuragrahi