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इश्क़ करों मगर इश्क़ में मशविरा भी ले लो।

इश्क़ करों मगर इश्क़ में मशविरा भी ले लो।

हम जा रहें हैं जंग मुहब्बत की हार के

रह चुके यहां बहुत शब-ए-गम गुजार के

आखिर मिल गई मंजिल मिल गया ईनाम

हमने किए हैं जो काम ग़म गुसार के

न विरान हो मयकदा न हो उदास बादाकश

लौट आएंगे मौसम ज़रूर फ़िर बहार के

हमने इंतजार बहुत किया वो क़रार बहुत की

मगर दिन नहीं आएं कभी वस्ल-ए-यार के

इश्क़ करों मगर इश्क़ में मशविरा भी ले लो

बड़ा नामचीं शख्स है अनुराग इस कारोबार के।