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इश्क में बर्बाद हम है सब कुछ कर चुके।

इश्क में बर्बाद हम है सब कुछ कर चुके
अपना छोड़ आबाद हम घर हसिनों का कर चुके।
हमको पता न था उल्फत भी होती है इतनी बेरहम
अपने हाथों ही जिंदगी तबाह हम है कर चुके।
शोख-ए-नजर की अदा मदहोश कर दी थी मुझे
आलम-ए-मदहोशी में ख़त्म खुद का चेहरा शनास कर चुके।
दावत-ए-इश्क में इतना मशगूल हो गया था कि मैं
घर की रोटी तक का तिरस्कार हम है कर चुके।
ग़म-ए-दिल के मुख्तसर का शायद दवा नहीं संसार में
दर्द-ए-दिल का इजहार हर किसी से हम है कर चुके।
मुफलिसी क्या है यारों इसका कोई नहीं लिबास
मुफलिसी के कारण ही अनुराग नौकरी घर रकिबो के है कर चुके।
©anuragrahi