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इश्क़ में जब हमने सारी दिवारे गिरा दी।

इश्क़ में जब हमने सारी दिवारे गिरा दी
रूह-ए-मजनू ने जाके तब हमें दुआ दी।
उसने मुझे इक झलक पर्दे से दिखा दी
आंखों ने देखा और दिल ने मुस्कुरा दी।
रात मेरे घर अजिब रोशनी सी आई
जलती हुई शमां को फिर हमने बुझा दी।
हर रात नए नए उसने ऐसे सपनें दिखाएं
निंद में ही हमने सारी उम्र गंवा दी।
उनपे न ये जमाना कोई इल्ज़ाम लगाए
मेरे दिल ने ही खुद है मुझको दगा दी।
पुछते है वो अनुराग की वजह-ए-खामोशी
जिनके दिल पर है मैंने प्यार की मोहर लगा दी।
©anuragrahi