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इश्क़ में मिली हमें बेवफ़ाई ।

इश्क़ में मिली हमें बेवफ़ाई
जिंदगी ने दी फकत तन्हाई ।
जो दिल-ओ-जां से मंजूर थे हमे
उन्ही ने थोप दिया है रूसवाई ।
वादियों में टहलने का क्या मतलब
भरी न हो फिजां में जब अंगराई ।
आकबत के लिए भी कुछ बचा के रखों
वगरना पुकारेंगे वहां भी कह कर तुम्हें हरजाई ।
मैं वहशी दिवाना हूं बस तेरे प्यार का
न घात करो दिल पर देके एसी जुदाई ।
अब अनुराग को रहेगा ताउम्र गमों का साथ
होंठों से तब्बसुम ने ले ली है अब विदाई।
©anuragrahi