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इस्लाम का कॉन्ट्रैक्ट

नहीं अनुबंध है शादी,.....कई जन्मों का है नाता,
दिलों के प्रेम का बंधन, धरा -अम्बर सा है रिश्ता।
अरे बेशर्म ओवैसी,.......कही है बात यह कैसी -
जरा पूछो न बीवी से, ...हलाला क्या उसे भाता ।।
पंकज प्रियम
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