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इससे अच्छा न प्यार का अफसाना होगा।

इससे अच्छा न प्यार का अफसाना होगा
मेरे जैसा न कोई और तेरा दिवाना होगा।
अपने गुरूर में हो तुम ठुकरा रही मुझे
याद कर लो इक दिन मुझे अपनाना होगा।
तेरे हर ग़म को अपने सिने से लगाया मैंने
तुझे भी ये क़र्ज़ कभी चुकाना होगा।
वक्त-ए-गर्दिश में अब तक न कोई आया मिलने
क्या कहूं तुझे भी कोई न कोई बहाना होगा।
परिंदें जो छू रहे है आसमां के ऊंचाईयों को
उनका भी जमीं पे कहीं न कहीं ठिकाना होगा।
दर्द-ए-दिल लेकर अनुराग कितना और तड़पोगे
मौत को ख़ुद-ब-खुद तुझे ही बुलाना होगा।
©anuragrahi