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जानें दो।.....let it be....

अभी टूट के गिरा हूँ,
जुड जानें दो।
मौका मिला है खुद से मिलने का,
मिल जानें दो।
तेरा वहम है कि मेरा वजूद सिर्फ मुझसे है,
ये भ्रम तेरा हवा का झोंका,
उड जानें दो ।
तू बला है न गुमां कर अपनी नजाकत पे,
है बदन हम सबका मिट्टी का,
मिल जानें दो ।
बड़ी मुश्किल से वक्त को रोके रखा था,
खोल दो वक्त को हवा में,
उड जानें दो ।
तेरा मेरा हम सबका एक ही मकसद है,
एक ही गुलशन के हम हैं गुल,
खिल जानें दो ।
है ये तुझसे गुजारिश आ मिल बातें करें,
फिर न रहूँगा मैं, न रहोगे तुम,
हां अब जानें दो।
हेमंत जोशी