कैसा भी हालात हो खुद को कमजोर मत समझना
ये कलयुग है भाई
जंगल के टेढ़े पेड़ को और टेढ़े कील को कभी कटा और ठोका नहीं जाता
सीधे को ही कटा और ठोका जाता है
क्योकी ये दुनिया अपनाना जानती है
किसी को कुछ देना नहीं
द्वार पर भिखारी को कुछ देना नहीं चाहते
और हर मंदिर में जाकर सब कुछ रहने पर
भी मांगआ करते हैं क्यों ये ये कलयुग है भाई
हालात कैसा भी हो सब देने से ज्यादा मांगा करते हैं
चाहे कुछ भी हो
©AMIT KUMAR
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