जब आदत तड़पने की जिस्म को लग गई है
फिर रूह से तड़पन को न अलग करना
मेरे चाहने वालों मेरे जिस्म को जलाने के बाद
इबादत मेरे तस्वीर का न कभी करना
वह चला जाएगा जहाँ से कोई लौटा नहीं करता
उसे शरीक अपने खुशी में करने को खुदा खुदा न करना
मुसलसल तैयार है हर बाप अपने जिम्मेदारीयों के खातिर
हमने वो पूरा नहीं किया किसी से गिला न करना
कश्ती कागज़ की कभी दरिया पार नहीं कराती
मुझ जैसे किसी गरीब से कभी दोस्ती न करना।