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जब भी उड़ने की🕊

ना किसी ने मेरी मरर्जी पुछी
ओर ना ही मेरी इज्जात लि
बस दुनियाँ के नियमों से
बांध दिया, जब भी उड़ने
की कोशिश की मेंने बेरहमी
से मेरे पंखो को काट दिया॥
आजादी से उड़ने की चाह थी
मेरी ओर दुपट्टा, कंगन ओर
पायल से मेरा नाता जोड़ दिया
फिर भी हार नहीं माना मेने
ओर इसे भी सम्भाल कर रख
लिया, दुनियाँ को फिर भी देखा
नहीं गया ओर मेरे दुपट्टे पर
दांग लगा दिया॥
जब भी उड़ने की कोशिश की
मेने मेरे पंखो को बैरहमी से
काट दिया॥
©banirai