दीमक लगी किताब सी,हो गई बच्चों की शक्ल,
पढ़ना कोई ना चाहता,मारे सारे नकल बेअक्ल,
पीटे उसने जो समझावे, सुनाए बुरी भली,
कहते माँ बाप से,मत दो जिंदगी में दखल,
अब रोने से क्या होगा, संस्कार डालने थे तब,
अब पछताए क्या, जब चिड़िया चुग गई फसल
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©vikasgarg
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