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जब जब ग़म में उतरता है।

जब जब ग़म में उतरता है

आंखों से आंसू गिरता है

पागल है या वहशी हैं ये

इतना गैरों पर क्यूं मरता है

राज की बात कोई इसे बताएं

ख़ून-ए-जीगर कौन करता है

महफ़िल महफ़िल फिरने वाला

बेचारा अब तन्हा रहता है

कौन सा इसने रोग लिया

न सोता है न जगता हैं

कैसे बुलाएं इसे कैसे हंसाएं

एक ज़ख़्मी दिल यह लगता है।

©anuragrahi