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जब मैं पहली बार उनके शहर को आया था।

जब मैं पहली बार उनके शहर को आया था
फकत साथ मेरे मेरा साया था।
हर गली हर रास्ते अंजान थे मेरे लिए
यहाँ का हर शख्स लगता पराया था।
रहने को ठौर नहीं सर छुपाने को घर नहीं
इस कदर जिंदगी ने मजाक बनाया था।
हम ना भुल पाएंगे वो मुफलिसी के दिन कभी
वक्त ने जब दो रोटी के लिए तरसाया था।
वो शख्स कहता है अब,कि मुझे भुल जाओ
कैसे भुल जाउं उसने मेरे बेबसी से हाथ मिलाया था।
कोई न था,तो वो था साथ हर कदम पे मेरे
तिजारत वश नहीं उसने दिल से मुझे अपनाया था।
एक बेदर्द बेरहम कठोर दिल को उसने
अपने लहजे में बोलना सिखलाया था।
एहतियातन हम एक-दूसरे को जब जुदा होना पड़ा
उन्की याद ने उस रात कसम से बहुत तड़पाया था।
जाते-जाते हमसे है उनकों कितना प्यार
आंखों ने उनके मोतीयों सी बूँद गिराकर जताया था।
©anuragrahi