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जब नीयरे के बगियावा उजड़ जाई हो।

जब नीयरे के बगियावा उजड़ जाई हो
गित गावे इ पपिहावा फेर कहां जाई हो।
गोरी के बदनवा के चाही भरल गहनवां
बेच के भी इ तनवा न हो पाई ढेर धनवा
अब कौना उपाय से लुगाई के मना लाई हो।
गित गावे इ पपिहावा फेर कहां जाई हो।
सिर्फ कहे खातिर संगवा उनकर हमार बा
हम मिली कैसे बिच में इ यमुना के धार बा
तोड़ दी अगर सबर के बंधवा सब बहा जाई हो।
गित गावे इ पपिहावा फेर कहां जाई हो।
अब वो निर्मोहीनी के न तनिको आभास बा
जिते जी उ मार दिहले कैसन वनवास बा
दुःख के समैया के कैसे दिल से भुला जाई हो।
गित गावे इ पपिहावा फेर कहां जाई हो।
जब नियरे के बगियावा उजड़ जाई हो,
गित गावे इ पपिहावा फेर कहां जाई हो।
©anuragrahi