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जब नज़र नज़र से मिली तो आदाब सालाम हो गया।

जब नज़र नज़र से मिली तो आदाब सालाम हो गया
उसका भी काम हो गया मेरा भी काम हो गया।
ये कैसी इखलास है पड़ गए दोनों अजब अजाब में
दिल को भी नहीं पता निगाहों से क्या कलाम हो गया।
इस दिल की दास्तां न पुछ है ये अजीब दास्तां
क़दम जो पड़े तेरे यहां तभी से ये दिल गुलाम हो गया।
कई तरह की कहानियां बनने लगी कुचा-ब-कुचा शहर में
कु-ब-कु उनका नाम हो गया काम अपना तमाम हो गया।
तुझसे वस्ल की ख्वाहिश लिए निकल पड़ा घर को तेरे
न पता न कोई खत थी,तूझे ढुंढते ढुंढते सुबह से शाम हो गया।
पुछ न वस्ल की हाल हालात-ए-वस्ल है बहुत ख़राब
अनुराग, रिश्ता-ए-जिस्म-ओ-जां के बिच जिस्म हराम हो गया।
©anuragrahi