जब रहनी लड़िकपन में त मिलल सबके दुलार हो
अब काहे सब छोड़ दिहले हमके मझदार हो।
कौन कसूर कईनी हमऽ हो ई शादी रचाई के
सब हित लोगन गईल रहले देखें हो हमरो लुगाई के
त कौना करणे दिहलन हमें दिलवा से उतार हो
अब काहे सब छोड़ दिहले हमके मझदार हो।
रहे एगो समैया उहो जब भर गईले गोदी ललनवा से
बहूं के त सब लोगन तौल दिहले रहले गहनवा से
आज काहे उहें सुरतिया लागे लागल बेकार हो
अब काहे सब छोड़ दिहले हमके मजधार हो।
एगो से दुई गो दुई गो से पांच पेट कारण भई गईले
केकरा भरोसे अनुराग हो आपन तू आमदनी न बढैले
इहे गलतियां दिहले तोहर घर द्वार सब उजाड़ हो
अब काहे सब छोड़ दिहले हमके मजधार हो
जब रहनी लड़िकपन में त मिलल सबके दुलार हो
आज काहे सब छोड़ दिहले हमके मजधार हो
अब काहे सब छोड़ दिहले हमके मजधार हो।
©anuragrahi
S