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जब सामने होता तुम्हारा चेहरा था।

जब सामने होता तुम्हारा चेहरा था
हर घड़ी माथे से बंधा सेहरा था।
वक़्त ने वो पल हमसे छिन लिया
जो कभी होता फकत तेरा मेरा था।
आसमां से गिर रही हैं बिजलीयां
जल चुकी है मरहला जो सुनहरा था।
विरानीयों में खो गई सुकूं ख्वाबिदा व
पनप रहे दिल के ख्वाब जो हरा भरा था।
काश पता होता अंजाम रूसवाई का अनुराग
कैसे टुटता है प्यार जो इतना गहरा था!
©anuragrahi