जब तू मुझसे दूर जाता है
जब तू दूर मुझसे जाता है,
हर फ़ासला भी क़रीब हो जाता है,
जो बस दिल में एक ख़्वाब था कभी,
वो रूह का नसीब हो जाता है…
हर दफ़ा ये दूरी धोखा देती है,
तू और भी क़रीब हो जाता है,
मैं ढूँढती हूँ तुझे हर तरफ़ मगर,
तू मुझमें ही अजीब हो जाता है…
मेरी साँसें तेरी साँसों से वाबस्ता हैं,
हर लम्हा तेरा हबीब हो जाता है,
तेरी धड़कन की आहट सुनते ही,
ये दिल मेरा बेचैन अजीब हो जाता है…
तेरी आवाज़ का जादू कुछ ऐसा,
हर दर्द भी नसीब हो जाता है,
मैं खुद को भूल के तुझमें खो जाऊँ,
तो इश्क़ मेरा अदीब हो जाता है…
और आख़िर में बस इतना समझ आया—
ये इश्क़ नहीं, कोई इबादत है,
मैं रहूँ ना रहूँ इस जहाँ में,
पर तू मेरी रूह के क़रीब हो जाता है…
Ink&Emotions
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